Thursday, September 23, 2010

hari ghas

हरी घास जिंदगी को सपनों से जोड़ती है और सपने हरी घास की तरह ही मखमली होते हैं तो आइये हरी घास पर आपका स्वागत है

2 comments:

  1. हरी घास पीली दूबों पर

    हरी घास पीली दूबों पर
    आतुर-सी,
    बैठी हुई
    प्रतीक्षाएँ

    आँखों में भर
    इन झरनों की गति
    फूलों की महक
    और लंबे पठार-सी एक उदासी,
    भीगे-पल
    टूटे सपनों की
    यादें बासी।

    कोई नहीं किसी गोधूली में आता
    बछड़े से मिलने को
    जैसे आती गाएँ

    एक नदी का बहना
    अपने भीतर-बाहर,
    कितने-कितने प्रश्न
    अनुत्तरित कुछ छूटे से,
    सर से पाँव
    रहे आदमकद
    हम टूटे-से।

    हल्की-हल्की धूप शाम की
    होती-सी निर्वस्त्र
    पेट से
    जैसी माँएँ।

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  2. हरी घास पर प्रेम
    प्रेम में तुम्हें चाहिए था
    एकांत और सन्नाटा और असंभव सब कुछ
    मुझे चाहिए था कोई प्राचीन चमत्कार

    प्रेम में तुम दौड़तीं हरी घास पर
    मैं निहारता तुम्हें एकाग्र
    पुल पर चढ़कर

    प्रेम में तुम धंसतीं मुझ में
    मैं धंसता तुम में
    जैसे कि एक नदी मिलती है
    दूसरी नदी में संपूर्ण
    शरीर मिलता है दूसरे शरीर में
    आत्मा दूसरी आत्मा में।

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